Logo text

होम » संस्थान » आईआईएम-ए के बारे में » केस पद्धति

मामला पद्धति


आईआईएम-ए का लक्ष्य प्रबंधन और नेतृत्व की चुनौतियों के लिए प्रतिभागियों को तैयार करना है। आईआईएम-ए मामला (प्रकरण) पद्धति का व्यापक उपयोग करता है। प्रबंध करने और नेतृत्व करने के लिए आवश्यक कौशलों को सीखने के लिए मामला पद्धति सबसे सशक्त तरीका है।

मामलों का विश्लेषण छात्रों को ठीक वैसे ही निर्णयों व दुविधाओं से निपटना सिखाता है जिनका प्रतिदिन प्रबंधकों को सामना करना पड़ता है। जिसमें प्रोफ़ेसर ज्ञान बाँटते हैं और परोक्ष रूप से छात्र उसे ग्रहण करते हैं, वैसे गतिशील व व्याख्यानों तक अंतर्निहित रहने वाले परंपरागत शिक्षण के बदले, मामला पद्धति ऐसे वर्गखंड सर्जित करती है, जिसमें छात्र  सिर्फ हकीकतों व सिद्धांतों से ही आत्मसात् नहीं होते बल्कि, समस्याओं से निपटने में विश्लेषण, संकलन, नेतृत्व एवं टीमवर्क जैसे कौशलों पर अभ्यास के द्वारा भी सफलता प्राप्त करते हैं। एक संकाय सदस्य के मार्गदर्शन में, छात्र परस्पर विरोधी डेटा और दृष्टिकोण का विश्लेषण और संश्लेषण करने, लक्ष्यों को परिभाषित करने और प्राथमिकता देने और अलग तरीके से सोचने वालों को राजी करने और प्रेरित करने, परिस्थितियों के माध्यम से सोचने, अपूर्ण और अनिश्चित जानकारी के साथ निर्णय लेने, और निर्णयों के निहितार्थ की जाँच करने के लिए कार्य करते हैं। 
मामला पद्धति कार्रवाई शिक्षा के सबसे करीब आती है। तेजी से इसे नियोक्ताओं द्वारा उम्मीदवारों को परखने के लिए भी आजमाया जा रहा है। 

ज़्यादातर मामले भा.प्र.सं.-अ. उत्पन्न करता है, जिसका वह उपयोग करता है और उसके 60% से ज्यादा वर्गखंड एक पाठभेद अथवा मामला पद्धति के आधार पर निर्मित होते हैं।  भा.प्र.सं.-अ. व्याख्यानों, अनुकार, क्षेत्रकार्य, स्वतंत्र अनुसंधान परियोजना, रोल प्ले और जैसे उचित लगे वैसे शिक्षा के अन्य रूपों का भी उपयोग करता है, फिर भी शिक्षाशास्त्र के रूप में मामला पद्धति का प्रभुत्व अखंड रहा है।

प्रति वर्ष वर्तमान प्रबंधकीय अभ्यास एवं रुझानों को प्रतिबिंबित करने के लिए मामलों की समीक्षा की जाती है।